हरियाणा में 3 साल के अनुभव वाले HCS अधिकारियों की SDM नियुक्ति पर उठे सवाल, नियमों को लेकर छिड़ी बहस

हरियाणा में 3 साल के अनुभव वाले HCS अधिकारियों की SDM नियुक्ति पर उठे सवाल, नियमों को लेकर छिड़ी बहस

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Questions raised over the appointment of HCS officers

चंडीगढ़। Questions raised over the appointment of HCS officers, हरियाणा में सिर्फ तीन साल के अनुभव वाले 11 एचसीएस (हरियाणा सिविल सेवा) अधिकारियों को एसडीएम (उपमंडल अधिकारी, नागरिक) बनाने पर नई बहस छिड़ गई है। एचसीएस काडर संख्या निर्धारण आदेश के अनुसार न्यूनतम पांच साल की सेवा वाले एचसीएस को ही एसडीएम लगाया जा सकता है।

वर्तमान में राज्य सरकार ने 2023 बैच के सात जूनियर स्केल आईएएस अधिकारियों और उसी वर्ष के 11 जूनियर स्केल एचसीएस अधिकारियों को एसडीएम लगाया हुआ है। इन आईएएस अधिकारियों में अंकिता पंवार (सांपला), अनिरुद्ध यादव (नारनौल), अभिनव सिवाच (बहादुरगढ़), आकाश शर्मा (टोहाना), कनिका गोयल (अंबाला कैंट), योगेश सैनी (महेंद्रगढ़) तथा रवि मीणा (झज्जर) एसडीएम के रूप में कार्यरत हैं।

इसी तरह 2023 बैच के ग्यारह एचसीएस अधिकारियों में कुंवर आदित्य विक्रम (नूंह), गुरविंदर सिंह (पेहोवा), विपिन कुमार (महम), आशीष सांगवान (बाढ़ड़ा), अजय हुड्डा (कलायत), रमन गुप्ता (इंद्री), विश्वनाथ (जगाधरी), हन्नी बंसल (फरीदाबाद), पारस भगोरिया (ऐलनाबाद), हरि राम (हथीन) तथा अंकित कुमार-2 (गोहाना) में एसडीएम के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट एवं प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने कहा कि इस तैनाती ने प्रशासनिक हलकों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या व्यावहारिक स्तर पर प्रदेश सरकार दोनों सेवाओं के जूनियर अधिकारियों को समान दर्जे का मान रही है।

आईएएस एक अखिल भारतीय सेवा है, जिसका संवैधानिक एवं प्रशासनिक दर्जा एचसीएस जैसी राज्य सिविल सेवा से ऊंचा है। फिर भी वर्तमान तैनाती व्यवस्था में दोनों सेवाओं के जूनियर अधिकारियों को समान पद पर कार्यरत रखा गया है।

दिसंबर 2025 में हरियाणा सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा जारी एचसीएस काडर संख्या निर्धारण आदेश में एसडीएम के पदों को सीनियर स्केल एवं सिलेक्शन ग्रेड के अधिकारियों के लिए दर्शाया गया है।

इस व्यवस्था को आधार माना जाए तो 2023 बैच के एचसीएस अधिकारियों की न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा जनवरी 2028 में पूरी होगी। इसके बाद ही वे नियमित रूप से एसडीएम पद पर तैनाती के पात्र होंगे। इसके बावजूद वर्तमान में उन्हें तीन वर्ष की सेवा के भीतर ही उपमंडलों की जिम्मेदारी सौंपे जाने से प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्न उठ रहे हैं।